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उमरिया। राज्य आनंद संस्थान, आनंद विभाग म. प्र. शासन के निर्देशानुसार उमरिया जिले का तीसरा विकासखंड स्तरीय एक दिवसीय परिचय कार्यशाला का आयोजन जनपद पंचायत मानपुर के सभागार में किया गया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अभय सिंह ओहरिया (आईएएस) के मार्गदर्शन में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत मानपुर राजेंद्र त्रिपाठी की उपस्थिति में आयोजित किया। कार्यशाला में राज्य आनंद संस्थान के मास्टर ट्रेनर्स संजय पाण्डेय, प्रतिभा कटरे, कुसुम पाठक, रूपा द्विवेदी एवं आशा तिवारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत माल्यार्पण एवं राज्य आनंद संस्थान की बुकलेट भेंट कर किया गया। सभी मास्टर ट्रेनर्स ने सामूहिक रूप से प्रार्थना कराया।
प्रथम सत्र में संजय पाण्डेय ने सभी प्रतिभागियों का परिचय लेते हुए राज्य आनंद संस्थान की वीडियो का प्रदर्शन किया और इसके साथ ही राज्य आनंद संस्थान की गतिविधियों के बारे में बताया। अल्प विराम के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा खुद से खुद की मुलाकात, खुद से खुद का संपर्क, खुद से खुद की बात ही अल्पविराम है। अल्पविराम के माध्यम से ही हम अपने जीवन को संतुलित कर सकते हैं, तनाव मुक्त कर सकते हैं,जीवन में आ रहे आवेगों और उद्वेगों पर नियंत्रण करते हुए अपनी आत्मा की आवाज सुन सकते हैं और संपूर्ण पवित्रता, ईमानदारी व सच्चाई के मार्ग पर चल सकते हैं। आनंद क्या है? आनंद कब-कब बढ़ता है? आनंद कब -कब घटता है? आदि पर सविस्तार चर्चा करते हुए कहा प्रतिस्पर्धा के इस युग में आम आदमी का आनंद कहीं खो गया है।उस खोए हुए आनंद को जीवन प्रबंधन के द्वारा पुनः लाया जा सकता है । विश्वास और आनंद की लौ से व्यक्ति अपने जीवन को प्रकाशित कर सकता है। कार्यक्रम के माध्यम से आनंद कैसे प्राप्त करें? जीवन प्रबंधन के बारे में परिचय कराया एवं मानसिक तनाव को दूर करने के बारे में बताया गया।
दूसरे सत्र में प्रतिभा कटरे मास्टर ट्रेनर्स आनंद विभाग द्वारा जीवन का लेखा-जोखा बताते हुए सभी प्रतिभागियों को बताया कि हम अपने जीवन रूपी कंपनी के सीईओ हैं। हमें अपनी खुशियों की चाबी दूसरे के हाथ में नहीं देना है। मदद और दुख के भावों को चार प्रश्नों के आधार पर बताते हुए अपने व प्रतिभागियों के अनुभवों के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि खुशहाल व संतुलित जीवन के लिए कृतज्ञता और माफी का महत्व क्या है।
मध्यावकाश में स्वरुचि पूर्ण भोजन के उपरांत श्रीमती कुसुम पाठक तीसरे सत्र का संचालन करते हुए जीवन में रिश्तों के महत्व पर प्रकाश डाला। अनुभव और वीडियो के आधार पर लोगों को रिश्तों की अहमियत समझाते हुए अपने जीवन में बिगड़े रिश्तों को सुधारने के लिए प्रयास करने को कहा।
चौथे सत्र में आशा तिवारी ने बताया कि हम खुद से खुद का संपर्क करते हुए अपने अंतर्निहित गलतियों, बुराइयों को पहचाने तथा उनमें सुधार कैसे करें, ताकि जीवन की दिशा व दशा बदल सके। इसी सत्र को आगे बढ़ते हुए अपने जीवन में किए गए परिवर्तनों को श्रीमती रूपा द्विवेदी ने फ्रीडम ग्लास के माध्यम से प्रदर्शित करते हुए स्वयं के परिमार्जन व परिशोधन की कहानी अपने ही जीवन के उदाहरणों से प्रस्तुत की।
प्रतिभागियों से भी सत्र के बीच में अनुभव प्राप्त किए गए एवं फीडबैक लिया गया।
कार्यक्रम के उपस्थित मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत मानपुर श्री राजेंद्र त्रिपाठी ने जीवन में अल्पविराम के माध्यम से असली आनंद प्राप्त करने की बात कही। कार्यक्रम के अंत में मास्टर ट्रेनर्स के द्वारा प्रेरणा गीत प्रस्तुत किया गया और श्री त्रिपाठी जी एवं मास्टर ट्रेनर्स के द्वारा द्वारा प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन संजय पांडेय ने किया।