शिक्षक की भूमिका, तकनीकी दुविधा और संतुलन का भारतीय मार्ग
कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारतीय शिक्षा के सामने दो राहें खोलती है। एक ओर यह शिक्षक को कागज़ी काम और दोहरावदार कार्यों से मुक्त कर सकती है, जिससे वह संवाद और मार्गदर्शन पर ध्यान दे सके। दूसरी ओर यह खतरा भी है कि शिक्षक महज़ “तकनीकी-प्रबंधक” बन जाए और शिक्षा का मानवीय सार खो जाए। भारत के लिए चुनौती यही है कि वह वैश्विक एआई केंद्र भी बने और साथ ही शिक्षा को मानवीय मूल्यों, सहानुभूति और आलोचनात्मक सोच से भरपूर भी बनाए रखे। यही संतुलन भविष्य की दिशा तय करेगा।