प्रदेश सरकार शराब नीति में बदलाव का प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में पेश करेगी

भोपाल, 10 जनवरी। मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2025-26 की शराब नीतियों में बदलाव का मन बना चुकी है। ज्ञात हो कि अब तक तीन-तीन ठेकेदारों के समूह बनाकर दुकानों की नीलामी की जाती थी। लेकिन नई शराब नीति एकल दुकानों की नीलामी की जा सकती है। इसके पीछे सरकार का मानना है कि इस बदलाव से प्रतिस्पर्धा होगी और राजस्व में वृद्धि होगी। लेकिन जानकारों की मानें तो इस एकल दुकान नीलामी नीति से सिंडिकेट बुरी तरह टूट जाएगा। प्रदेश के कई जिलों में गली-गली शराब बिक्री की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि प्रदेश में 3,605 कंपोजिट शराब दुकानें हैं, जिनकी नीलामी 1,100 समूह बनाकर की गई। तय किया गया है कि आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुमति से ही शराब की दुकानें खोली जाएंगी। धार्मिक स्थलों के पास स्थित कुछ दुकानें बंद भी की जाएंगी। 2025-26 के लिए प्रस्तावित नीति जल्द ही कैबिनेट में पेश की जा सकती है।
प्रदेश में देसी और विदेशी शराब की अलग-अलग दुकानों के स्थान पर कंपोजिट दुकानों की व्यवस्था लागू की गई है। वार्षिक मूल्य में 15 प्रतिशत की वृद्धि करके नवीनीकरण किया गया। चूंकि दुकानों के समूह बनाकर प्रक्रिया की गई, इसलिए अधिकांश दुकानें नवीनीकरण में चली गईं। जिनका नवीनीकरण नहीं हुआ, उन्हें वार्षिक मूल्य घटाकर दिया गया। इस बार नवीनीकरण के स्थान पर एकल दुकानों की नीलामी पर जोर दिया जाएगा। वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और नए लोगों को भी मौका मिलेगा। उज्जैन समेत कुछ अन्य धार्मिक स्थलों के आसपास स्थित शराब की दुकानें बंद हो सकती हैं। दरअसल, महाकाल लोक बनने के बाद देशभर से आने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। कई बार शराब की दुकानों के आसपास कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ जाती है। इससे गलत संदेश जाता है, इसलिए कुछ दुकानें बंद की जा सकती हैं।