समग्र शिक्षा अभियान योजना अन्तर्गत कक्षा 1 से 8 वीं तक के 88445 बच्चों को दी जा रही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

उमरिया, 27 नवंबर। समग्र शिक्षा अभियान अन्तर्गत कक्षा नर्सरी से कक्षा 8वी तक शिक्षा के अधिकार के तहत कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इस उददेश्य के तहत समग्र शिक्षा अभियान योजना अन्तर्गत 88445 बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है । जिले में कक्षा 1 से 8वी तक संचालित शासकीय शालाओं की संख्याह 849 है एवं अशासकीय शालाओं की संख्या 164 है। जिसमें शासकीय शालाओ में कुल दर्ज बच्चों की संख्या 62888 है तथा अशासकीय शाला में अध्ययनरत कुल दर्ज बच्चों की संख्या 25557 है । जिले में समग्र शिक्षा अभियान अन्तर्गत शासकीय स्कूल में अध्ययनरत कक्षा 1 से 8वी तक समस्त छात्रों को निशुल्क पाठयपुस्तक वितरण की जाती है। जिले में लाभांवित छात्रों की संख्या 62888 है।
जिले में समग्र शिक्षा अभियान अन्तर्गत शासकीय स्कूल में अध्ययनरत कक्षा 1 से 8वी तक समस्त छात्रों को 2 जोडी निशुल्क गणवेश की राशि प्रदाय की जाती है। वन क्लिक के माध्यम से बच्चो के खाते में राशि अन्तरित की गई है। जिले में लाभांवित छात्र संख्या 62888 है।
जिले में समग्र शिक्षा अभियान अन्तर्गत शासकीय स्कूल में अध्ययनरत कक्षा 6वी के ऐसे बच्चे जिसके गॉव में माध्यमिक स्कूल संचालित नही है उनको निशुल्का साइकिल वितरण अन्तर्गत प्रति छात्र 4500 के मान से प्रदाय की जाती है। जिले में सत्र 2024-25 में पात्र बच्चें की संख्या – 1766 है। पात्र बच्चों का पोर्टल पर वेरीफिकेशन का कार्य प्रचलन में है।
आईटीई के तहत निशुल्क प्रवेश- शिक्षा के अधिकार अधिनियम अन्तर्गत अशासकीय शैक्षणिक संस्थाओं नर्सरी से कक्षा 8 वी तक के लिए विद्यालय की प्रथम प्रवेशी कक्षा के कुल शीट का 25 प्रतिशत उन बच्चो को जो अ0ज0जा0, अ0जा0, बी0पी0एल0 के अन्तर्गत आते है का निशुल्क प्रवेश दिया जाता है जिसकी फीस शासन द्वारा विद्यालय को प्रदाय की जाती है। आरटीई के तहत निशुल्को प्रवेशित छात्र/छात्राओं की संख्या 507 है।
आईसीटी लैब- जिले की तीनो विकासखंडों करकेली, मानपुर तथा पाली में में 33 विदयालयों में स्मार्ट क्लास अन्तर्गत इन्ट्रेक्टिव पेनल 36 तथा 36 कम्यूटर की स्थापना की गई है।
दिव्यांग बच्चों को भत्ता वितरण के तहत दिव्यांग बच्चों को 4 प्रकार के भत्ता प्रदाय की जाती है। जिसमें 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले दिव्यांग बच्चो जो शास0 अथवा अनुदान प्राप्त अशासकीय शालाओं में दर्ज है, एवं जिसकी उपस्थिति 75 प्रतिशत से अधिक है। ऐसे बच्चो को परिवहन भत्ता प्रदाय किया जाता है। परिवहन भत्ता 578 बच्चों को प्रति छात्र 3000 रू0 के मान से हितग्राही के खाते में प्रदाय की जाती है।
इसी प्रकार 70 प्रतिशत से अधिक कमर से नीचे /अस्थि बाधित, बहु विकलांग , दृष्टि बाधित , मानसिक मंदता वाले बच्चो जिसकी उपस्थिति 75 प्रतिशत से अधिक है। ऐसे बच्चो को परिवहन भत्ते के साथ साथ मार्गरक्षण भत्ता प्रदाय किया जाता है। मार्गरक्षण भत्तो 127 बच्चों को प्रति छात्र 3000 रू0 के मान से हितग्राही के खाते में प्रदाय की जाती है।
80 प्रतिशत से अधिक दृष्टि बाधित जो शास0 अथवा अशासकीय अनुदान प्राप्त शाला में दर्ज है , ऐसे कक्षा 1 से 8 के बच्चो को परिवहन भत्ता , मार्गरक्षण भत्ता के साथ साथ वाचन भत्तो प्रदाय किया जाता है। वाचन भत्ता 20 बच्चों को प्रति छात्र 2500 रू0 के मान से हितग्राही के खाते में प्रदाय की जाती है।
40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाली बालिकाओं जो शास0 अथवा अशासकीय अनुदान प्राप्त शालाओं में दर्ज है, एवं जिसकी उपस्थिति 75 प्रतिशत है ऐसी समस्त बालिकाओं को अन्य भत्तो के साथ साथ स्टायफण्ड की राशि प्रदाय की जाती है । स्टायफण्ड भत्ता 272 बच्चों को प्रति छात्र 2000 रू0 के मान से हितग्राही के खाते में प्रदाय की जाती है।
दिव्यांग बच्चों को प्रमाण पत्र वितरण- जिले में समग्र शिक्षा अभियान अन्तर्गत ऐसे दिव्यांग बच्चें जिनकी आयु 6 से 15 वर्ष के है ऐसे 129 छात्र छात्राओं का दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाये गये है।
जिले में समग्र शिक्षा अभियान अन्तर्गत शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत निशुल्क शिक्षा देने हेतु बालिकाओं के लिए (3) के0जी0बी0व्हीद0 जिसमें 500 बालिकाऐं एवं (4) बालिका छात्रावास जिसमें 400 बालिकाओं के लिए संचालित है। समस्त छात्रावासों में समुचित सुविधाऐं प्रदान की जाती है। जिस ग्राम में माध्यमिक विदयालय की सुविधा न हो या अधिक दूरी पर हो, ऐसे ग्रामों के छात्राओं को इन छात्रावास में प्रवेश दी जाती है। छात्रावास में सभी वर्गाे के बालिकाओ को प्रवेश दिया जाता है। जिसमें गरीबी रेखावाली बालिका हो, सिंगल पैरेंट हो, अनाथ हो, शाला त्यागी, अप्रवेशी हो, 75 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाती बालिकाऐ एवं अन्य वर्ग की बालिकाओं को 25 प्रतिशत प्रवेश दी जाती है। समस्त बालिकाओं को शैक्षणिक सामग्री एवं व्यक्तिगत सामग्री, दो जोडी गणवेश, स्वेटर, वृत्ति की राशि दी जाती है। सभी प्रकार के खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, जीवन कौशल, व्यवसायिक कौशल, सिलाई, पेंटिग, पार्लर एवं अन्य सुविधाऐ तथा आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्रदाय किया जाता है।
दिव्यांग बच्चों का चिन्हॉकन- जिले में समग्र शिक्षा अभियान अन्तर्गत शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत कक्षा 1 से 80वी तक के चिन्हॉंकित दिव्यांग बच्चें की संख्या 1231 है।
जिले में समग्र शिक्षा अभियान अन्तर्गत शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इस उददेश्य से जिले में 50 सीटर दिव्यांग बच्चों का छात्रावास संचालित किया जा रहा है। जिसमें ऐसे बच्चें जो विद्यालय जाने में असमर्थ है या जिनके घर से विदयालय की दूरी अधिक है उन दिव्यांग मूक बधिर, दृष्टिबाधित, मानसिक मंद, सेरेबल पालसी, बहु दिव्यांग ऐसे बच्चों को छात्रावास में प्रवेश दिया जाता है। वर्तमान में 50 छात्र/छात्राऐं निवासरत है।
बालक छात्रावास संचालित -जिले में समग्र शिक्षा अभियान अन्तर्गत शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इस उददेश्य से जिले में 100 सीटर बालक छात्रावास संचालित किया जा रहा है। जिसमें ऐसे बच्चे जो शाला त्यागी, अप्रवेशी, अनाथ, बेघर ऐसे बच्चों को छात्रावास में प्रवेश दिया जाता है। वर्तमान में 100 बालक निवासरत है।
उल्लास -नव भारत साक्षरता- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानो के अनुसार प्रदेश में साक्षरता दर बढाने हेतु 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के असाक्षरो को साक्षर करने हेतु उल्लाहस नव भारत साक्षरता कार्यक्रम वर्ष 2022 से 2027 तक संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम अन्तर्गत वर्ष में 2 बार बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की जाती है। दिनॉक 22 सितम्बर 2024 को आयोजित मूल्यां कन परीक्षा में जिले में नव भारत साक्षरता के तहत 20080 परीक्षार्थी शामिल हुए।
समग्र शिक्षा अभियान -यह केन्द्र प्रवर्तित व्यापक कार्यक्रम है जो विद्यालय तक सुगम पहुँच तथा बेहतर अधिगम परिणामों के समान अवसर उपलब्ध करवाने व विद्यालय शिक्षा में सुधार के व्यापक लक्ष्यों को सामने रख पूर्व प्राथमिक से माध्यमिक कक्षा स्तर को समग्र रूप से समाहित कर शुरू किया गया है। समग्र शिक्षा ,सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए), यह योजना पूर्व प्राथमिक, प्राथमिक, माध्यमिक स्तर तक ‘निरंतरता के रूप में विद्यालय‘ की परिकल्पना करती है तथा विद्यालय शिक्षा के विभिन्न कक्षा स्तरों में अंतरण दर में सुधार करने और बच्चों को विद्यालय शिक्षा पूरी करने के लिए सार्वभौमिक पहुँच को बढ़ावा देने में सहायता करती है।