लापरवाह डॉक्टरों से पीडित को लाखों रूपये भुगतान करने आदेश

जनहित मे फैसला, आमजनों में आयेगी जागरूकता

लोगों का इस आदेश से न्यायालय के प्रति विश्वास सम्मान और बढ गया है वही लापरवाह डाक्टरों में हडकंप की स्थिति बनी हुई है

मामला 2014 का है जब एक मरीज अपेंडिक्स के इलाज के लिए डॉ प्रदीप धाकड़ के संपर्क में आया, डाॅ प्रदीप धाकड़ जोकि उस समय नरसिंहपुर में पदस्थ शासकीय डाक्टर थे उन्होंने मरीज को प्राइवेट अस्पताल पराड़कर में भर्ती होने को कहा, मरीज डाक्टर प्रदीप धाकड़ के निर्देशानुसार डा पराग पराड़कर के अस्पताल में भर्ती हो गया जहाँ डाक्टर प्रदीप धाकड़ ने मरीज का अपेंडिक्स का आपरेशन किया और डॉक्टर प्रदीप धाकड़ ने मरीज के ऑपरेशन में लापरवाही पूर्वक इलाज करते हुए उसके पेट में कॉटन छोड़ दिया, जिससे उस मरीज की तबीयत और ज्यादा बिगड़ गई और उसे नागपुर इलाज के लिए जाना पड़ा और अंततः उस मरीज की मृत्यु हो गई।

मरीज की पत्नी ने वकील उमेश नेमा के माध्यम से नरसिंहपुर जिला विवाद प्रतितोषण फोरम नरसिंहपुर में परिवाद दायर किया कि डॉक्टरों की लापरवाही से मेरे पति की मृत्यु हुई है माननीय न्यायालय ने परिवाद को स्वीकार करते हुए डॉक्टरों की लापरवाही मानते हुए 5 लाख पीड़ित पक्ष को देने का आदेश किया है

इस मामले में डॉ प्रदीप धाकड़ ने न्यायालय को बताया था कि जो तथ्य आपके सामने रखे हैं वे बेबुनियाद और झूठे हैं इसलिए कृपया कर इस परिवाद को निरस्त किया जाए वही इस मामले में डॉ पराग पराड़कर की लापरवाही भी उजागर हुई है जिनके अस्पताल में शासकीय डॉक्टर रहते हुए डॉ प्रदीप धाकड़ ने मरीज का इलाज किया था वहीं डॉ पराग पराड़कर ने न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि डॉ प्रदीप धाकड़ ने निवेदन किया था कि मरीज का इलाज करने हेतु आपका ऑपरेशन थिएटर उपलब्ध कराया जाए क्योंकि शासकीय जिला अस्पताल में यह सुविधा नहीं है और मरीज की संपूर्ण जांच दवाइयां डॉक्टर प्रदीप धाकड़ ने ही उपलब्ध कराई थी और उनके कहने पर ही मरीज को डिस्चार्ज किया था मैंने मरीज का ऑप्शन नहीं किया था इसलिए मेरे विरुद्ध परिवाद निरस्त किया जाए।

माननीय न्यायालय ने यह माना कि डॉ प्रदीप धाकड़ ने पराडकर अस्पताल में मरीज का इलाज लापरवाही पूर्वक किया एवं उससे ₹8000 भी लिए, मरीज की हालत बिगड़ते देख उसके परिजन उसे नागपुर ले गए जहां डॉक्टरों ने बताया कि मरीज के पेट में कॉटन छूट गई थी।

डाक्टर प्रदीप धाकड़ व डाॅ पराग पराड़कर संयुक्त रूप से अथवा पृथक पृथक मरीज के ऑपरेशन में की गयी लापरवाही के लिए उत्तरदायी हैं अतः माननीय न्यायालय ने परिवादी को मानसिक एवं शारीरिक क्लेश हेतू कुल क्षतिपूर्ति राशी 5 लाख रूपये एवं वाद व्यय के लिए 5000 रूपये भुगतान करने आदेशित किया है दो माह के अंदर भुगतान नहीं होने पर 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज ताअदायगी भी देय होगा।

वही जिला उपभोक्ता फोरम के इस आदेश से लापरवाह डाक्टरों में हडकंप और आम जनों में खुशी की लहर है