पर्यटकों को भाता है ग्रामीण परिवेश एवं ग्रामीण व्यंजन
उमरिया – अपनी वाइल्ड लाइफ के लिऐ देशी विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सैलानियों के ठहरने के लिए जंगल के बीच बने होम स्टे खूब पसंद आ रहा है, इससे जहां स्व-सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे है, वही गांव की महिलाएं आर्थिक सशक्तिकरण की नई इबारत भी लिख रही हैं।
एमपी टूरिज्म ने पर्यटन के क्षेत्र में स्व-सहायता महिलाओं को रोजगार से जोड़ने होम स्टे की शुरुआत की है। बांधवगढ़ का रंछा गांव घने जंगल के बीच बसा है, इसकी इसी खासियत का उपयोग सैलानियों को आकर्षित करने में हो रहा, खासबात यह है कि वाइल्ड लाइफ से प्रेम करने वाले शहरो के वीआईपी लोगों को गांव की मिट्टी के बीच रहकर उनको जानने, समझने और देसी व्यंजनों का लुफ्त, पर्यावरण की अहमियत का अहसास करा रहा है।
मुंबई से आये आई पर्यटक मीनांक्षी जी का कहना है कि हम लोग क्रंकीट के जंगल में रहते है । मिट्टी की सोंधी खुशबू तथा लकड़ी के ताप से बने भोजन की हम लोग कल्पना भी नही कर सकते है । बांधवगढ टाईगर रिजर्व आकर जब जन जातीय संस्कृति , पशुपालन , यहां के भोजन, रीति रिवाज से अवगत हुई तो ऐसा लगा कि हमारे जीवन कि एक कड़ी इन सबके बिना अधूरी ही रह जाती। इसी तरह उनके पति पंकज सुधीर मिश्रा का कहना है कि लकडी और मिटटी से बने आवास में रहना , सिलौटी में बनी चटनी तथा चूल्हे में बना स्थानीय व्यंजन , फाईव स्टार होटलों में बने व्यंजन से कई गुना स्वाद का अनुभव कराता है । मप्र सरकार के पर्यटन विभाग की यह एक अनोखी पहल है इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डा मोहन यादव जी को धन्यवाद देता हूं।