जान बचाकर भागीं शेख हसीना – बांग्लादेश में तख्तापलट
ढाका, 5 अगस्त। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना पीएम पद से इस्तीफा देकर अपना देश छोड़कर भागीं। प्राप्त जानकारी के अनुसार उनका हेलीकाप्टर अगरतला मेें देखा गया है। माना जा रहा है कि वे अपनी बहन शेख रिहाना के साथ भारत में हैं। ज्ञात हो कि लगभग एक महीने पहले बांगलादेश की सरकार ने 1971 में मुक्ति संग्राम में शामिल होने वाले लोगों के रिश्तेदारों को सरकारी नौकरी में 30 प्रतिशत आरक्षण का आदेश जारी किया था। जिसके बाद से पूरे बांग्लादेश में जगह-जगह हिंसा और प्रदर्शन तेज होता नजर आया। हालाकि सरकार के इस फैसले को जुलाई अंत में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया लेकिन तब तक हिंसा की आग चारों ओर फैल चुकी थी और सैकड़ों इस आग में जलकर खाक हो चुके थे।
गौरतलब है कि बांग्लादेश में लगभग एक महीने से जारी आरक्षण विरोधी प्रदर्शन कब खत्म होंगे इसे लेकर कुछ अंदाजा लगा पाना अभी संभव नहीं है। आरक्षण के इस मुद्दे ने प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से बेदखल जरूर कर दिया है अब देश में सेना ने कमान संभाल ली है और आर्मी चीफ ने अंतरिम सरकार का गठन कर देश चलाने की बात कही है। 1971 में पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश एक अलग देश बना, एक मुल्क के तौर पर बांग्लादेश की किस्मत पाकिस्तान से बेहतर तो रही लेकिन राजनीतिक हालात लगभग एक जैसे ही रहे. बांग्लादेश की आजादी से लेकर अब तक हुए चुनावों में से महज 4 चुनाव को ही स्वतंत्र और निष्पक्ष माना गया है।
बांग्लादेश की सरकार अक्सर चुनावी हिंसा, विरोध और मतदान में धांधली के आरोपों में घिरती रही है। पाकिस्तान से अलग होने के बाद 7 मार्च 1973 को बांग्लादेश में पहली बार आम चुनाव हुए, बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाले शेख मुजीबुर रहमान की अध्यक्षता में अवामी लीग ने चुनाव में एकतरफा जीत दर्ज की। 15 अगस्त 1975 को बांग्लादेशी सेना के कुछ जूनियर अधिकारियों ने शेख मुजीब के घर पर टैंक से हमला कर दिया। इस हमले में मुजीब सहित उनका परिवार और सुरक्षा स्टाफ मारे गए। सिर्फ उनकी दो बेटियां शेख हसीना और शेख रेहाना की जान बच पाई थी क्योंकि वो उस समय जर्मनी घूमने के लिए गई हुई थीं। पिता की हत्या के बाद शेख हसीना अपने परिवार के साथ भारत आईं, तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने उन्हें भारत में शरण दी, हालांकि उस समय भारत में आपातकाल लगा हुआ था। भारत में करीब 6 साल रहने के बाद 1981 में शेख हसीना अपने परिवार के साथ ढाका लौटी थीं जहां उनका जोरदार स्वागत हुआ था।