विकास : उस सिस्टम का इनकाउंटर कब होगा, जिससे अपराध की दुनिया फलती-फूलती है…?

दिल्ली, 10 जुलाई। उ.प्र. के एक दुर्दांत अपराधी विकास दुबे का अंत हो गया है। कहते हैं हर पापी को उसके पाप की सजा जरूर मिलती है। जैसी करनी वैसी भरनी। विकास दुबे ने अपने जीवन में जितने कुकर्म किए अंत में उसकी सजा उसे वैसे ही मिली। विकास के किले नुमा घर को ढ़हा दिया गया उसके गैंग के एक एक व्यक्ति को पुलिस ने गोली मारकर हत्या (इनकाउंटर) कर दी। अंत में विकास् को भी पुलिस ने गोलीमार कर हत्या कर दी जिसे इंकाउंटर का नाम दिया गया। अब सवाल यह है कि उस सिस्टम और पुलिस की कार्यप्रणाली का इनकाउंटर कब होगा जिसके सहारे अपराध की दुनिया और अपराधी की खेती को खाद पानी दिया जाता है?
विकास दुबे को उसकी करनी की सजा मिली। लेकिन विकास की मौत और उसके इनकाउंटर के पीछे बहुतेरे सवाल खड़े हुए हैं। उ.प्र. पुलिस का यह कहना कि विकास की गाड़ी पलट गयी, उसमें से वह निकला और पुलिस का हथियार छीनकर भागने लगा इन पुलसिया कहानी पर कोई विश्वास नहीं कर सकता। विकास अपराधी जरूर बहुत बड़ा था लेकिन इस समय वह भागने की स्थिति में नहीं था। मानसिक और शारीरिक रूप से थका दिखने वाला विकास पैर से भी लंगड़ा था। इसलिए पुलिस की कहनी पूरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत लगती है। एक अकेला अपराधी व्यक्ति जिसे दर्जनों आधुनिक हथियारों से लैस पुलिस के जवान दबोचकर गाड़ी में बैठाए हों और वह अपराधी व्यक्ति पुलिस वाले का हथियार छीनकर पुलिस पर हमला कर दे यह तथ्य कितना हस्यास्पद है। अकेला अपराधी पुलिस की गाड़ी में पुलिस का हथियार कैसे छीन लेता है? पुलिस के इंकाउंटर पर हमेशा सवाल खड़े होते हैं?
मीडिया में आ रही ख़बरों के मुताबिक विकास जिस गाड़ी में बैठा था जिसे उज्जैन से पुलिस कानपुर ले जा रही थी और वह गाड़ी (सफारी थी) जो पलटी वह गाड़ी यानि कार दूसरी थी। यानि ला रही गाड़ी और पलटी गाड़ी दोनों अलग-अलग थी…? दूसरा सवाल यह भी है कि विकास दुबे को इसलिए मार दिया गया क्योंकि उसके जीवित रहने से कई राज वह खोल देता जिसमें खाकी और खादी के उस गठबंधन के मजबूत धागे का तार-तार हो जाता जिसके सहयोग और सहारे उसने अपने अपराध की दुनिया की मजबूत नींव रखी थी। यदि ऐसा नहीं होता तो उसके दुर्दांत अपराधी बनने के कहानी इतनी लंबी नहीं होती।
उ.प्र. की योगी सरकार के कार्यकाल के तीन साल बीत चुके हैं। इन तीन सालों में कानपुर के इस दुर्दांत अपराधी पर योगी सरकार लगाम लगाने में नाकाम क्यों रही..? क्या योगी सरकार उन 8 पुलिस वालों की मौत का इंतजार कर रही थी? यह भी एक बड़ा सवाल है। विकास और उसके गैंग को मौत के घाट उतारने वाली योगी सरकार क्या उन पुलिस वालों और नेताओं के ऊपर उतनी ही सख्ती से कार्रवाई करेगी जिसने विकास के माफिया के राज को फलने फूलने में तन-मन से योगदान दिया था? जिन पुलिस वालों के सहयोग से विकास दुबे ने पुलिस वालों की हत्या की थी क्या योगी सरकार उन पुलिस वालों पर भी इतनी सख्ती दिखाएगी जितना विकास और उसके साथियों पर दिखाई है? या लाइन जाहिर करके और स्थानांतरण करके उनके अपराधों पर पर्दा डालकर अपनी जिम्मेदारी पर तिलांजलि डाल देगी?
कोई भी अपराध और अपराधी तब तक फलता फूलता नहीं जब तक उसे पुलिस और नेताओं का संरक्षण नहीं मिलता। यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है। विकास ने जो किया उसे उसका पूरा और भरपूर फल मिला। लेकिन विकास दुबे को पालने पोषने वाले का अब क्या होगा? जिन्होंने उसे जरायम की दुनिया का बादशात जैसी रूतबा दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। क्या विकास के अपराध को विकसित करने वालों को बचाने के लिए फर्जी तरीके से पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में उसे ढ़ेर कर दिया।