नर्मदा प्राकट्योत्‍सव पर कानून व्‍यवस्‍था बनाए रखने, मेला स्थल नो व्हीकल जोन घोषित

जबलपुर, 3 फरवरी।  नर्मदा प्राकट्‌योत्सव के दौरान संपूर्ण मेला स्‍थल पर शांति, सुरक्षा और कानून व्‍यवस्‍था बनाए रखने अपर जिला मजिस्‍ट्रेट सुश्री मिशा सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्‍मक आदेश जारी किया है। प्रतिबंधात्‍मक आदेश तत्‍काल प्रभाव से लागू भी हो गया है। ज्ञात हो कि नर्मदा प्राकट्योत्‍सव के लिए प्रशासन ‌द्वारा झण्डा चौक से ग्वारीघाट, उमाघाट, दरोगाघाट, खारीघाट, जिलहरीघाट एवं सिद्धघाट को मेला स्‍थल के रूप में चिन्हित किया गया है।
नर्मदा प्राकट्योत्‍सव पर मां नर्मदा के दर्शन, स्‍नान एवं पूजा अर्चना करने बड़ी संख्‍या में श्रद्धालुओं के आने की संभावनाओं के मद्देनजर भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयोजन से तथा व्यापक लोकहित को दृष्टिगत रखते हुए जारी इस आदेश में रेतनाका एवं अवधपुरी से वाहनों का गौरीघाट क्षेत्र में प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया गया है। यहां से केवल पैदल चलकर ही नर्मदा तट पर जाने की अनुमति होगी। वाहनों को अवधपुरी से लेफ्ट टर्न कराकर आयुर्वेदिक कालेज ग्राउंड में पार्क किया जाएगा। यहां से श्रद्धालु पैदल जिलहरी घाट वाले रास्ते से उमाघाट तक जा सकेंगे। वापसी के समय वाहनों को केवल भटौली मार्ग से शहर के लिए वापस लौटने की व्यवस्था होगी। इमरजेंसी वाहनों को छोड़कर मेला स्थल को नो व्हीकल जोन घोषित किया गया है।
प्रतिबंधात्‍मक आदेश में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाये रखने के लिए प्रशासन ‌द्वारा चिन्हित स्‍थलों को छोड़कर मेला स्थल एवं मार्ग के किसी भी स्थान पर भंडारा, स्वागत मंच, अस्थाई पूजन-अर्चन, मंच, जगराता, आर्केष्ट्रा इत्यादि के आयोजन को पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। मेला स्थल पर भोजन और प्रसादी का वितरण तथा भंडारा आदि का आयोजन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। आदेश में स्‍पष्‍ट किया गया है कि नगर निगम, पुलिस व मेला प्रभारी अधिकारी ‌द्वारा चिन्हित स्थान पर ही भंडारा का आयोजन किया जा सकेगा।
प्रतिबंधात्‍मक आदेश के अनुसार मेला स्थल पर लाउडस्पीकर और डीजे आदि का प्रयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। नर्मदा के तट पर 5 फरवरी तक आतिशबाजी और पटाखों का उपयोग करना पूर्णतः वर्जित होगा। संपूर्ण मेला स्थल पर अस्थाई दुकान लगाना सर्वथा वर्जित होगा। इसी प्रकार मां नर्मदा मंदिर गौरीघाट (मां नर्मदा नदी के बीच में स्थित मंदिर) तक नौका आदि के संचालन पर भी पूर्णत: रोक लगा दी गई है। प्रतिबंधात्‍मक आदेश में कहा गया है कि इसका उल्‍लंघन होने पर दोषी व्‍यक्तियों के विरूद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 तथा अन्य समस्त प्रावधानों के अंतर्गत वैधानिक कार्यवाही की जावेगी।