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उमरिया – उप संचालक कृषि ने बताया कि जिले में ग्रीष्मकालीन मूंग का रकबा लगभग 5000 हेक्टेयर है। जिले के किसानों द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग की विभिन्न किस्मों के माध्यम से उत्पादन लिया जाता है। जिसमें किसानों के द्वारा फसल में आने वाली कीट व्याधि के नियंत्रण हेतु लगभग 4 से 5 बार कीटनाशक दवाओं का स्प्रे किया जाता है। साथ ही फसल को जल्दी पकाने हेतु विशेष कीटनाशक गिलाईफोसेट या पैराक्वाईड या डायक्वाईड नामक दवाओं का स्प्रे किया जाता है। दवाओं के छिड़काव से वातावरण एवं मूंग के दानों में हानिकारक प्रभाव डालने वाले अंश आ जाते हैं, जिसके कारण वर्तमान में विभिन्न प्रकार की बीमारियां आ गई हैं। अधिकतर मानव शरीर कैंसर नामक बीमारी से ग्रसित है।
कृषि विभाग उमरिया किसानों से अपील की गई है कि ग्रीष्मकालीन मूंग उत्पादन करते समय कीट व्याधि के नियंत्रण हेतु रासायनिक कीटनाशक दवाओं का उपयोग कम से कम कर जैविक कीटनाशक का उपयोग करें साथ ही फसल को जल्दी पकाने वाली कीटनाशक दवाओं का उपयोग कतई न करें।