सुकांत मजूमदार के प्रस्ताव से पं. बंगाल की सियासत में हड़कंप

कोलकाता, 25 जुलाई। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखा। जिसमें उन्होंने उत्तर बंगाल को उत्तर पूर्वी राज्यों में शामिल करने का प्रस्ताव रखा। मजूमदार के इस पत्र ने पश्चिम बंगाल की सियासत में ऐसा हड़कंप मचाया कि इस प्रस्ताव को राज्य की सत्तारूढ़ दल टीएमसी ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है और राज्य में अशांति पैदा करने की कोशिश करार दिया।
गौरतलब है कि मजूमदार को उनके ही पार्टी के विधायक की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। कार्शियांग के भाजपा विधायक विष्णु प्रसाद शर्मा ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के प्रस्ताव को अवास्तविक करार दिया है। इस प्रतिक्रिया से बीजेपी में भी अंदरूनी कलह सामने आयी। सुकांत मजूमदार के इस बयान के बाद उत्तर बंगाल के विभाजन की मांग और जोर पकड़ने लगी है। राजवंशी समुदाय के नेता और भाजपा के राज्यसभा के सांसद अनंत महाराज ने अलग कूचबिहार राज्य की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि अलग कूचबिहार राज्य की मांग पर पहले ही सहमति जताई गई थी। दार्जिलिंग में पहले से ही अलग गोरखालैंड राज्य की मांग हो रही है। अलग गोरखालैंड की मांग लेकर कई बार हिंसक आंदोलन हो चुके हैं। इसके साथ ही उत्तर बंगाल में अलग कामतापुरी की राज्य की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है। दक्षिण बंगाल में रार बंगाल को अलग राज्य देने की मांग को लेकर आंदोलन हो रहे हैं। सुकांत मजूमदार के बयान से फिर से बंगाल में अलग राज्य की मांग तेज हो गई है।
इसके लिए पहले उत्तर बंगाल की सियासत को समझना होगा। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उत्तर बंगाल की आठ सीटों में से सात सीटों पर जीत हासिल की थी. साल 2024 में हालांकि पश्चिम बंगाल में बीजेपी को झटका लगा है और उसकी सीटों की संख्या 18 से घटकर 12 रह गयी है, लेकिन उत्तर बंगाल में बीजेपी अपनी पकड़ बकरार रखी है और आठ में से छह सीटों पर जीत हासिल की, लेकिन एक लोकसभा सीट कूचबिहार से केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नीशिथ प्रमाणिक को पराजय का सामना करना पड़ा. ऐसी स्थिति में यह साफ है कि उत्तर बंगाल में बीजेपी ने अपनी सियासी जमीन तैयार कर ली है और यदि उत्तर बंगाल को लेकर सुकांत मजूमदार के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार अमल करती है, तो इसका फायदा बीजेपी को सियासी रूप से मिलेगा और उसका वोटबैंक मजबूत होगा।