UP- संभल में श्री कल्कि धाम के शिलान्यास समारोह में PM मोदी
उत्तर प्रदेश, 19 फरवरी। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उत्तरप्रदेश, संभल में श्री कल्किधाम के शिलान्यास समारोह में पहुंचे। शिलान्यास के अवसर पर पीएम ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज छत्रपति शिवाजी महाराज की जन्मजयंती भी है। ये दिन इसलिए और पवित्र हो जाता है, और ज्यादा प्रेरणा दायक हो जाता है। आज हम देश में जो सांस्कृतिक पुनरोदय देख रहे हैं, आज अपनी पहचान पर गर्व और उसकी स्थापना का जो आत्मविश्वास दिख रहा है, वो प्रेरणा हमें छत्रपति शिवाजी महाराज से ही मिलती है।
उन्होंने कहा कि आज संभल में हम जिस अवसर के साक्षी बन रहे हैं, ये भारत के सांस्कृतिक नव जागरण का एक और अद्भुत क्षण है। अभी पिछले महीने ही, 22 जनवरी को देश ने अयोध्या में 500 साल के इंतज़ार को पूरा होते देखा है। रामलला के विराजमान होने का वो अलौकिक अनुभव, वो दिव्य अनुभूति अब भी हमें भावुक कर जाती है। इसी बीच हम देश से सैकड़ों किलोमीटर दूर अरब की धरती पर, अबू धाबी में पहले विराट मंदिर के लोकार्पण के साक्षी भी बने हैं। पहले जो कल्पना से भी परे था, अब वो हकीकत बन चुका है। और अब हम यहां संभल में भव्य कल्कि धाम के शिलान्यास के गवाह बन रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हम ये कह सकते हैं कि कल्कि कालचक्र के परिवर्तन के प्रणेता भी हैं, और प्रेरणा स्रोत भी हैं। और शायद इसीलिए, कल्किधाम एक ऐसा स्थान होने जा रहा है जो उन भगवान को समर्पित है, जिनका अभी अवतार होना बाकी है। आप कल्पना करिए, हमारे शास्त्रों में सैकड़ों, हजारों साल पहले भविष्य को लेकर इस तरह की अवधारणा लिखी गई। हजारों वर्षों बाद की घटनाओं के लिए भी सोचा गया। ये कितना अद्भुत है। और ये भी कितना अद्भुत है कि आज प्रमोद कृष्णम् जैसे लोग पूरे विश्वास के साथ उन मान्यताओं को आगे बढ़ा रहे हैं, अपना जीवन खपा रहे हैं। वो भगवान कल्कि के लिए मंदिर बना रहे हैं, उनकी आराधना कर रहे हैं। हजारों वर्ष बाद की आस्था, और अभी से उसकी तैयारी यानी हम लोग भविष्य को लेकर कितने तैयार रहने वाले लोग हैं। इसके लिए तो प्रमोद कृष्णम् जी वाकई सराहना के पात्र हैं। मैं तो प्रमोद कृष्णम् जी को एक राजनैतिक व्यक्ति के रूप में दूर से जानता था, मेरा परिचय नहीं था। लेकिन अभी जब कुछ दिनों पहले मेरी उनसे पहली बार मुलाकात हुई, तो ये भी पता चला कि वो ऐसे धार्मिक-आध्यात्मिक कार्यों में कितनी मेहनत से लगे रहते हैं। कल्कि मंदिर के लिए इन्हें पिछली सरकारों से लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। कोर्ट के चक्कर भी लगाने पड़े! वो मुझे बता रहे थे कि एक समय उन्हें कहा जा रहा था कि मंदिर बनाने से शांति व्यवस्था बिगड़ जाएगी। आज हमारी सरकार में प्रमोद कृष्णम् जी निश्चिंत होकर इस काम को शुरू कर पाये हैं। मुझे भरोसा है कि, ये मंदिर इस बात का प्रमाण होगा कि हम बेहतर भविष्य को लेकर कितने सकारात्मक रहने वाले लोग हैं।