कहीं कांग्रेस न पलट दे हेमंत सोरेन की राजनीतिक बिसात
झारखंड मुक्ति मोर्चा के टेंशन का पारा हाई करने सिमडेगा में शांति बाला केरकेट्टा, मनिका में मुनेश्वर ओरांव, तोरपा से पुनित हेम्ब्रम भी बगावत कर मैदान में हैं। जहां पर कांग्रेस के बागी मैदान में हैं इनमें से कुछ सीट तो जेएमएम की सीटिंग सीट है। कांग्रेस के बड़े नेता अब तक इन बागियों की पहुंच से दूर होते नजर आ रहे हैं। और इन सब से यह स्पष्ट है कि कांग्रेस के इन बागियों से बीजेपी को अच्छा खासा नुकसान भुगतना पड़ सकता है।
हेमंत सोरेन एक बार फिर सत्ता में बने रहने के लिए ऐड़ी चोटी का बल लगाने में प्रयासरत हैं। लेकिन सत्ता के गलियारों में यह चर्चा गरम है कि अपने ही सहयोगियों के खिलाफ राजनीतिक रण जीतना सोरेन के लिए मुसीबत बना हुआ है। इस राजनीतिक उथल-पुथल के चलते यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस बार कांग्रेस के समर्थन के बिना हेमंत सोरेन की पार्टी 42 का यह जादुई आंकड़ा को आसानी से नहीं छू पाएगी। कांग्रेस झारखंड मुक्ति मोर्चा की सहयोगी पार्टी है। ज्ञात हो कि 2019 में जेएमएम की 30 और कांग्रेस की 15 सीटों के बल पर ही दोनों पार्टियों की सरकार बन सकी। इस बार भी सरकार बनाने के लिए दोनों पार्टियों को बेहतरीन प्रदर्शन करना होगा।