राम मंदिर निर्माण में क्षत्रियों की भागीदारी अनिवार्य-राजेश सिंह
अयोध्या, 14 जुलाई। हिन्दुओं के आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के भव्य मंदिर की निर्माण प्रक्रिया धर्म नगरी अयोध्या में चल रही है। मंदिर निर्माण में क्षत्रियों की भागीदारी अनिवार्य है तभी शास्त्रोक्त विधि का अनुपालन होगा ।शास्त्रोक्त विधि अनुपालन क्रम में मंदिर निर्माण के पहले और बाद में होने वाले भूमि पूजन शिलान्यास विग्रह प्राण प्रतिष्ठा यज्ञ आदि धार्मिक अनुष्ठान में क्षत्रिय उपस्थित अनिवार्य है । उक्त बातें समाजसेवी राजेश सिंह मानव ने पत्रकार वार्ता में व्यक्त किया।
राजेश मानव ने कहा कि पद्धति ग्रंथ पाणिनीय सूत्र में वर्णित है कि यज्ञ विधि विधान में क्षत्रिय ही अधिकारी माना गया है। किसी अन्य को नहीं । वही ग्रंथ शतपथ ब्राह्मण में कहा गया है कि यज्ञ करने का अधिकार उसी कुलीन क्षत्रियों को है जो मूर्धाभिषिक्त राजा हो ब्राह्मण या वैैश्य को इसका अधिकार नहीं है ऐसे में मंदिर निर्माण के मध्य होने वाले धार्मिक अनुष्ठान में क्षत्रियों की भागीदारी आवश्यक है ।
प्रेस वार्ता में लाला सीता राम द्वारा लिखित पुस्तक अयोध्या का इतिहास भी दिखाया तथा कहा कि राजा विक्रमादित्य ने अयोध्या की पहचान किया था तथा राम मंदिर का निर्माण अयोध्या का रेखांकन एवं पुनर्वासन करके श्री रामचंद्र जी की वंशजों को लाकर अयोध्या तीर्थ के मंदिरों का निर्माण कराना आरंभ किया था । राजा विक्रमादित्य सनातन वैदिक परंपरा को बरकरार रखने के लिए बनारस के पंडितों की सलाह पर धौराहर सिंह महाराज को अध्यक्ष सिंहासन पर बैठाया और अयोध्या के मंदिरों के निर्माण का संपादन कराया। राजा धोराहर सिंह ने त्रेता ठाकुर मंदिर का भी निर्माण कराया था जिसमें मां सीता व राम की सोने की मूर्तियां स्थापित की । राजा धोराहर सिंह का स्मृति चिन्ह धौराहर अयोध्या में आज भी विद्यमान हैं ।
राजेश ने कहा कि सरकार से उनकी मांग है अयोध्या में बनने वाला राम मंदिर राजा विक्रमादित्य की परिकल्पना तथा सनातन परंपरा के अनुरूप निर्मित और 84 कसौटी शिला के खंभे लगाए जाएं । राजा विक्रमादित्य द्वारा निर्मित मंदिर 42 किलोमीटर दूर से दिखाई पड़ता था उसी के अनुरूप वर्तमान मंदिर भव्य और गगनचुंबी बनाया जाए। इसकी ऊंचाई का कोई अन्य मंदिर ना हो। राजेश सिंह ने अपने प्रेस वार्ता के माध्यम से यह भी मांग किया कि राम मंदिर निर्माण के लिए गठित ट्रस्ट में बड़ी संख्या में क्षत्रियों को भी अस्थाई सदस्य नामित किया जाए ।शासन से यह भी मांग किया कि ट्रस्ट का जो लोगो है भी बदल दिया जाए तथा उसमें राम की मूर्ति बाल रूप में स्थापित की जाए ।वर्तमान ट्रस्टी सनातन परंपरा के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं । उन्होंने मंदिर निर्माण के गर्भ गृह को बिगाड़ दिया है। जो सरासर गलत है।नेपाल के प्रधानमंत्री द्वारा राम को नेपाली कहे जाने के सवाल पर प्रधानमंत्री को मूर्ख भ्रष्ट एवं पागल करार दिया । उन्होने मंदिर निर्माण का श्रेय सनातन परम्परा के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी को दिया।