लक्ष्मण शक्ति, मेघनाद बध, कुम्भकरण बध सत्य और असत्य का युद्ध प्रारंभ
जबलपुर। धनुष यज्ञ रामलीला ससिमति के तत्वाधान में बताया गया तुलसीकृत रामायण के अनुसार युद्ध प्रारंभ होने के पूर्व रावण को शांति के सभी अवसर प्रदान किये गये रावण द्वारा विभीषण को भरी सभा में लात मारना फिर उसके पश्चात रामदल का नेतृत्व व परम सहयोगी विभीषण को बनाया गया। रामदल का युद्ध का नेतृत्व लक्षमण जी को दिया गया व रावण दल का मेघनाद को युद्ध भूमि में भीषण युद्ध हुआ मेघनाद पराजित होने के भय से उसने ब्रम्हास्त्र का प्रयोग किया जिसकी वजह से लक्ष्मण भूमि में धरासाई हो गये चारो ओर हाहाकार मच गया भगवान राम विलाप करने लगे उसी समय विभीषण ने बताया लंका में सुषेण वैद्य के द्वारा इनका इलाज संभव है। सुषेण वैद्य द्वारा द्रोणागिरी पर्वत पर संजीवनी बूटी इस कार्य के लिये हनुमान जी पहुंचते हैं, दशानन को इस बात की जानकारी होती है उसने अपनी मामा मारीच की सहायता से हनुमान के कार्य को रोकने का प्रयास करता है इसी क्रम में भरत जी द्वारा वायु मार्ग से हनुमान जी को जाते हुये देख तीर मारकर उनके मार्ग का अवरूद्ध करते हैं जैसे ही हेराम सुनते हैं और दशानन के साथ युद्ध की जानकारी मिलती है वह अपने वाण से हनुमान जी को तत्काल युद्ध भूमि में पहॅंचा देते हैं। संजीवनी बूटि से लक्ष्मण खड़े हो जाते हैं और मेघनाद जहां पर यज्ञ हवन कर रहा होता है विध्वंश करके मेघनाद का बध कर देते हैं।
रावण युद्ध के लिये सबसे बलशाली कुंभकरण को युद्ध भूमि में भेजता है। विभीषण व कुंभकरण आपस में बात करते हैं
कुंभकरण भी इस बात को जानता है कि नारायण से बैर लेना गलत है परन्तु भाई को समझाने में असफल रहते हैं। कुंभकरण रामजी से युद्ध करता है उसकी सभी भुजाओं को धड़ से अलग कर वीर गति को प्राप्त होता है। लंका में हाहांकार मच जाता है। अंतिम योद्धा के रूप में लंकेश्वर युद्ध के लिये अपने मंत्रियों समेत युद्ध करने के लिये आकाश मार्ग से युद्ध भूमि के लिये चल देता है तभी लीला को विराम दिया जाता है। विशेष सूचना- कल दिन मंगलवार रात्रि 9.00 बजे विजया दशवीं की लीला का मंचन किया जायेगा जिसका स्थान छापाखाना, आर.सी.सी. ग्राउण्ड रात्रि 9.00 बजे लीला प्रारंभ होगी उसी के तत्काल बाद लीला समाप्ति के साथ विजयी जलूस बाजपेई, तिवारी अखाड़े साथ गैरीशन ग्राउण्ड से प्रारंभ होगा जिसमें सदर बाजार, गोरा बाजार, मोदीवाड़ा, लगभग 40 से 45 प्रतिमायें प्रतिवर्ष के अनुसार रामलीला जुलूस के बाद बाजार काली से क्रमशः चलेंगी जुलूस का नेतृत्व धनुष यज्ञ रामलीला समिति बाजपेई तिवारी अखाड़ा के साथ सभी प्रतिमायें क्रम से चलेगी जो सदर की विभिन्न गलियों से होते हुये कालीमाई मंदिर प्रांगण से रामलीला मैदान में जुलूस को विराम दिया जायेगा ।
कल की लीला के प्रथम चरण में भजन संगीत, सुमर्नी, आरती, गणमान्य नागरिकों के साथ आयोजित होगी। हमारी लीला सजीव रथ रूण, युद्ध, मेघनाद, कुंभकरण, दशानन, के प्रतीक पुतले के साथ आतिषबाजी का भी कार्यक्रम आयोजित है। विजयी जुलूस में भगवान राम नगरवासियों को आशीर्वाद स्वरूप खजाना जनता को बांटेंगे। बड़ी आकर्षक लीला है संस्कारधानी की अद्वितीय दशहरा कार्यक्रम है जिसमें लगभग 50 फुट का रावण, मेघनाद, कुंभकरण के पुतले बनाये जायेंगे। समस्त जानकारी रामलीला समिति के व्यवस्थापक अभिषेक चैकसे के द्वारा बताया गया । सभी से अनुरोध है हमारे इस कार्य में सहयोग प्रदान करें ।
अपीलकर्तागण सीताराम कुरचानिया, अभिषेक चैकसे, मधुर तिवारी, धनंजय बाजपेई, संदीप चैकसे, शंकर पाण्डे, विजय बाजपेई, दिनेश शुक्ला, संजय शुक्ला, प्रकाश सोनी, प्रमोद तिवारी, बन्नी महावर, रवि महावर, रत्नेश अवस्थी, आशीष पाठक, सतीश पाठक, कैलाश श्रीवास्तव, नरेश तिवारी, राम स्वरूप, डी.पी. कमल, आदि ।