भारत में बनी देशी शराब और बीयर हुई सस्ती
जयपुर, 6 फरवरी। राज्य सरकार ने शनिवार को वर्ष 2021-22 के लिए नई आबकारी नीति जारी कर दी। 15 साल बाद सरकार ने लॉटरी और रिन्यूअल की बजाय नीलामी के जरिए दुकानों के आवंटन का प्रावधान किया है। राज्य में 1 अप्रैल से भारत में बनी देशी शराब और बीयर पर वेंड फीस खत्म कर दी गई है। सरकार ने एक साल में शराब बिक्री से 13 हजार करोड़ रुपए की कमाई का लक्ष्य रखा है।
राज्य सरकार ने नए वित्तीय वर्ष में नीलामी के जरिए दुकानों के आवंटन का प्रावधान किया है। एक व्यक्ति को प्रदेश में 5 से ज्यादा और एक जिले में दो से ज्यादा दुकान आवंटित नहीं की जाएंगी। आबकारी नीति में इसके लिए राइडर लगाया गया है। इसके अलावा शराब की दुकानों की संख्या में इजाफा न करते हुए 7665 ही रखी है। हालांकि देसी और अंग्रेजी शराब की दुकानें अब कम्पोजिट होंगी।
शहरी क्षेत्रों में भारत में बनी देशी शराब और बीयर वार्षिक लाइसेंस फीस और स्पेशल वेंड फीस को समाप्त कर दिया गया है। अग्रिम जमा राशि 14.5 से घटाकर 8 प्रतिशत कर दी गई है। देशी शराब और बीयर के एजुलाइज्ड बिल राशि का 7 प्रतिशत कम्पोजिट फीस होगी। बीयर पर अतिरिक्त आबकारी ड्यूटी में 10 प्रतिशत की कमी की गई है। बीयर की एमआरपी में 30 से 35 रुपए तक कमी की गई है। साथ ही भारत निर्मित विदेशी शराब और विदेशी आयातित शराब के अलावा अन्य आबकारी उत्पादों पर कोविड सरचार्ज को समाप्त कर दिया गया है।
नई आबकारी नीति में स्थानीय निकाय, प्राधिकरण और प्राधिकारी द्वारा रेस्टोरेंट का लाइसेंस मिल जाता है तो बिना कन्वर्जन के ही बार खोलने का लाइसेंस मिल जाएगा। नई नीति में व्यावसायिक भूखंड की बाध्यता को हटा दिया है। शहरी निकायों से मंजूरी प्राप्त हर होटल बार लाइसेंस का पात्र होगा। बार लाइसेंसधारक अब फ्रेश बीयर बनाने का मिनी प्लांट या माइक्रो ब्रेवरी लगा सकेंगे। होटल एंड रेस्टोरेंट बार लाइसेंस फीस यथावत रखकर साल 2021-22 के लिए लाइसेंस फीस में 10 प्रतिशत की छूट दी गई है। नए बार लाइसेंस की स्थिति में आवेदक को सम्पूर्ण फीस के स्थान पर 10 प्रतिशत ही अग्रिम जमा कराने का प्रावधान किया है।