चीन के बयानों को तवज्जो देने की तबतक जरूरत नहीं जब तक वो पीछे नहीं हट जाता – भारत

नई दिल्ली, 28 मई। भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा पर तनाव लगातार जारी है। दोनों पक्षों के बीच 6 राउंड की बातचीत असफल हो चुकी है। लोगों के मन में सवाल है कि आखिर कोरोना काल में चीन ऐसी हरकतें क्यों करने लगा। एलएसी के पैंगोंग शो, डेमचोक और गालवान घाटी इलाके में करीब 1,200 से 1,500 चीनी सैनिक हैं और भारतीय सैनिक उनको कारगर तरीके से रोके हुए है। यहीं नहीं, चीन ने विवाद वाले क्षेत्र के करीब अतिरिक्त सैनिक अपने इलाके में बढ़ाए हैं और करीब 5 हजार सैनिक वहां मौजूद हैं। चीनी हरकत को देखते हुए भारत ने इस इलाके में सैनिकों की संख्या बढ़ी दी है।
पिछले करीब एक महीने से चल रहे विवाद का कई राउंड की बैठकों के बाद टलता नहीं दिख रहा है लद्दाख सीमा पर भारत के सख्त रूख के बाद चीन ने अपने रुख में नरमी लाते हुए वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मौजूदा तनाव को लेकर दोस्ती भरा बयान देने लगा। बता दें कि भारत में चीन के राजदूत सुन वेडांग ने कहा है कि भारत और चीन एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं हैं। द्विपक्षीय सहयोग में दोनों देशों के मतभेद की परछाई पड़ने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। कुछ पत्रकारों और युवाओं के डेलिगेशन के साथ वेबिनार में राजदूत सुन वेडांग ने कहा, ‘ड्रैगन और हाथी के साथ-साथ डांस करने की हकीकत को समझना चीन और भारत दोनों के लिए सही विकल्प है। इसी से दोनों देशों और उनके नागरिकों के मूल हित सुरक्षित रहेंगे। दो बड़ी उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में चीन और भारत को आपसी सहयोग मजबूत करना चाहिए। जिससे दोनों समान हित के केक का विस्तार कर सकें।’
हालांकि भारतीय रक्षा सूत्रों ने कहा कि चीन के बयानों को तबतक खास तवज्जो देने की जरूरत नहीं है जबतक जमीनी हकीकत में कोई बदलाव न हो। बता दें कि लद्दाख सीमा पर भारत और चीन के सैनिकों में करीब एक महीने से तनातनी चल रही है। भारत ने चीन को माकूल जवाब देने के लिए लद्दाख में सैनिकों की तैनाती भी बढ़ा दी है। सेना के शीर्ष अधिकारी ऑपरेशनल तैयारियों में जुटे हुए हैं। सुरक्षा सूत्रों का मानना है कि जबतक चीनी सुरक्षाबलों बिना किसी शर्त के लद्दाख के इलाकों से पीछे नहीं हटते हैं तबतक ऐसे बयानों का कोई मतलब नहीं है। सूत्रों ने बताया कि बुधवार को चीन विदेश मंत्रालय और उसके राजदूत के बयान के कुछ ज्यादा मायने नहीं निकाला चाना चाहिए। सूत्रों ने बताया कि जबतक भारत की सीमा वाले इलाके में घुसी चीनी सेना वापस नहीं जाती है तबतक इन बयानों का कोई मतलब नहीं है। शब्दों को कार्रवाई में बदलना होगा।
​अभी 26 मई को ही चीन का रक्षा बजट आया है। इस साल इसे 179 बिलियन डॉलर रखा गया है, इसके पीछे देश के सामने खड़ी चुनौतियों को बताया गया है। पिछले साल के मुकाबले में इसे 6.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। भारत की बात करें तो हमारा रक्षा बजट साल 2020 के लिए 66.9 बिलियन डॉलर है। चीन का ताजा बजट इसका 2.7 गुना ज्यादा है। अगर युद्ध मिसाइलों का होता है तो भारत और चीन एक दूसरे की जद में हैं। भारत के पास 5 हजार किलोमीटर तक मार करनेवाली अग्नि-5 मिसाइल है। चीन का ज्यादातर हिस्सा इसकी रेंज में है। वहीं चीन के पास DF-41 मिसाइल है। 2019 में दिखाई गई इस मिसाइल के साथ दावा किया गया था कि यह 30 मिनट में अमेरिका पर हमला कर सकती है। इसकी रेंज 9,320 किलोमीटर है। इसे न्यूक्लियर हथियार ले जाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।