प्रधानमंत्री से भेंट कर कमलनाथ ने की विकास के मुद्दों पर चर्चा

भोपाल । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से उनके निवास स्थान 7 लोक कल्याण मार्ग में मुलाकात की। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनने पर शुभकामनाएँ दी।

लगभग आधे घंटे की मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने केन्द्र में प्रदेश हित की लंबित योजनाओं एवं उनसे जुड़ी राशि शीघ्र जारी करने के बारे में विस्तार से चर्चा की। नाथ ने प्रधानमंत्री से योजनाओं से जुड़ी लंबित राशि को शीघ्र पारित करवाने की मांग की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को आश्वासन दिया कि वे इस संबंध में संबंधित मंत्रालयों को शीघ्र कार्यवाही करने का निर्देश देंगे और साथ ही भविष्य में भी प्रदेश के हितों का ध्यान रखेंगे।

मुख्‍यमंत्री कमल नाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के प्रस्‍तावित तृतीय चरण में वर्तमान सड़कों का अपग्रेडेशन करने का अनुरोध किया है। श्री नाथ ने योजना में वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर उन गाँवों और बसाहटों को भी शामिल करने का अनुरोध किया है, जो पहले इस योजना में छूट गए थे। श्री नाथ के अनुसार उनके इस प्रस्ताव के मान्य होने से छूटे गये गाँव भी सब पक्की सड़कों से जुड़ जाएंगे। कमलनाथ ने आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से उनके निवास पर भेंट की और प्रदेश के विकास के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।
खनिज उत्‍खनन की बड़ी परियोजनाओं को दे स्वीकृति
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का ध्यान मध्‍य प्रदेश में खनिज उत्‍खनन से संबंधित लगभग 20 बड़ी परियोजनाओं की ओर दिलाया, जो विभिन्‍न अनुमतियों के लिये भारत सरकार के विभिन्‍न विभागों में लंबित हैं । उन्होंने कहा कि यदि यह अनुमतियाँ मिल जाती हैं तो प्रदेश को काफी अधिक मात्रा में राजस्‍व आय की प्राप्ति होगी।
गेहूँ उपार्जन की सीमा 75 लाख मीट्रिक टन करें
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में गेहूँ उपार्जन की सीमा 75 लाख मीट्रिक टन करने का भी प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली में प्रदेश में गेहूँ उपार्जन पर वर्तमान में 67.25 लाख मीट्रिक टन की सीमा तय की गयी है। इसके पहले भारत सरकार ने माह फरवरी में 75 लाख मीट्रिक टन की सीमा स्‍वीकृत की थी । यह सीमा पुराने 4 वर्ष के उपार्जन के आंकड़ों के आधार पर तय की थी ।